पुणे की अदालत ने महाराष्ट्र के चर्चित नासरापुर बालिका दुष्कर्म एवं हत्या मामले में दोषी भीमराव कांबळे (65 वर्ष) को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" श्रेणी का मानते हुए कहा कि यह ऐसा जघन्य अपराध है जिसमें कठोरतम सजा देना न्याय के हित में आवश्यक है।
क्या था पूरा मामला?
1 मई 2026 को पुणे जिले के नासरापुर क्षेत्र से तीन वर्षीय बच्ची लापता हो गई थी। परिवार द्वारा सूचना देने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट, डीएनए जांच और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने भीमराव कांबळे को गिरफ्तार किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई गवाहों और तकनीकी सबूतों के जरिए आरोपी के खिलाफ मामला साबित किया।
अदालत का फैसला
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी को अपहरण, दुष्कर्म और हत्या सहित विभिन्न आरोपों में दोषी माना। सजा सुनाते समय न्यायालय ने कहा कि मासूम बच्ची के साथ की गई क्रूरता और अपराध की प्रकृति इसे "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" मामलों में शामिल करती है। इसी आधार पर अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई।
तेज जांच और सुनवाई
इस मामले में पुलिस ने कम समय में जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद विशेष अदालत में लगातार सुनवाई हुई और अपेक्षाकृत कम समय में फैसला सुनाया गया। इस प्रक्रिया को न्यायिक प्रणाली की तेज कार्रवाई के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है
आगे की कानूनी प्रक्रिया
भारतीय कानून के अनुसार, सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं होती, जब तक संबंधित उच्च न्यायालय इसकी पुष्टि न कर दे। इसके बाद भी दोषी के पास अपील और अन्य कानूनी उपाय उपलब्ध रहते हैं।
पुणे की अदालत का यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों पर न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत इस मामले में आगे उच्च न्यायालय में भी सुनवाई होगी और अंतिम निर्णय उसी प्रक्रिया के बाद प्रभावी होगा।
By Rahul T ( worldtaq.com)
